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waqt shayari by javed akhtar



http://www.youtube.com/watch?v=QnfM9pZYm2w&feature=related




वक़्त !
ये वक़्त क्या है
ये क्या है आखिर कि  जो मसल्सल गुजर रहा है
ये जब न गुज़रा था तब कहाँ था?
कहीं तो होगा!
गुज़र गया है तो अब कहाँ है?
कहीं तो होगा !
कहाँ से आया, किधर गया है?
ये कब से कब तक का सिलसिला है?
ये वक़्त क्या है ?

ये वाकये ये हादसे ये तसातुम
हर एक गम और हर एक मसर्रत
हर एक क़जीयत हर एक लज्ज़त
हर एक तबस्सुम हर एक आंसू
हर एक नगमा हर एक खुसबू
वो ज़ख्म का दर्द हो कि वो लम्ज़ का हो जादू
खुद अपनी आवाज़ हो कि माहौल कि सदायें

ये जेहन में बनती और बिगडती हुयी फज़ाए
वो फिक्र में आये ज़लज़ले हों दिल में  हलचल

तमाम एहसास
सारे जज्बे
ये जैसे पत्ते  हैं
बहते पानी कि सतह पे जैसे तैरते हैं
अभी यहाँ है,
अभी वहां है,
और अब हों ओझल ,
दिखाई देता नहीं है लेकिन ये कुछ तो है जो कि बह रहा है !
ये कैसा दरिया है !
किन पहाड़ों  से आ रहा है?
ये किस  समुन्दर को जा रहा है?
ये वक़्त क्या है ?

कभी कभी मैं ये सोचता हूँ
 कि चलती  गाड़ी से पेड़ देखो तो ऐसा लगता है  दूसरी संत जा रहे हैं
कभी कभी मैं ये सोचता हूँ
 कि चलती  गाड़ी से पेड़ देखो तो ऐसा लगता है  दूसरी संत जा रहे हैं

मगर हकीकत में पेड़ अपनी जगह खड़े हैं
तो क्या ये मुमकिन है
सारी सदियाँ कतार अन्दर कतार अपनी जगह खड़ीं हो
ये वक़्त साकित  हो और हम ही गुजर रहे हों

इस एक लम्हें में सारे लम्हें तमाम सदियाँ छुपी हों
न कोई आइन्दा न गुज़िस्तान
जो हो चुका है हो रहा है
जो होने वाला है हो रहा है
मैं सोचता हूँ कि क्या ये मुमकिन है
सच ये हो कि सफ़र में हम हैं
गुजरते हम हैं
जिसे समझते हैं हम गुजरता है ,  वो थमा है
गुजरता है या थमा हुआ है
इकाई है या बंटा हुआ है
है मुंज़मिद या पिघल रहा है
किसे खबर है किसे पता है?
ये वक्त क्या है ?

-(जावेद अख्तर)

ek aur kavita

कुछ करो नया, कुछ करो नया
कुछ नया रंग फ़िर भरो जरा,
फ़िर कुछ बिजली सी चमकाओ
तूफ़ानो सा फिर चलो जरा।

कुछ बात व्यंग से निकली थी
तुम बात नई फिर करो जरा,
होते होते जो रह गयी थी
उस विपदा का हल करो जरा।

कुछ कहने वाले कह गये थे
कुछ हमसे भी तुम सुनो जरा,
जो कहते सुनते रह गयी थी
उस बात मे दम फिर भरो जरा।

कुछ अजब रंग की चालों से
ये जीवन गाथा भरो जरा,
कुछ देर अभी तुम और रुको
पग धरती पर रहे धरो जरा |

आकाश उमड़ कर आया है
जीवन का सागर लाया है,
इस वर्षा मे तुम भीग डूब
जीवन मे रस फिर भरो जरा।

कुछ आशायें बाकी हैं अभी
कुछ देर अभी दम रखो जरा,
सूरज बस उगने वाला है
निज ध्येय को जाके छुओ जरा।

-प्रदीप

5 days of facebook: lyrics of new video

Lyrics of the song 5 days of Facebook
Recently i came across this pretty innovative video by Manish jain and Rahul Bhatt! Its awesome..so touching and so novel! Two parallel videos of comparing real life with expectations...its really too good! And the acting by Gaurav Gera is so natural.. and very good direction by Manish. Mixing and editing is also just prefect! Really great team effort! Initially I was so amazed by the concept and the music that i couldn't focus on lyrics. So i thought to put down those beautiful words also down here.
Here is the youtube link of the video!

कल  को  ना  जाने  कोई  इधर
आशाओं  के  रंग  बिखरे  जिधर
आवाज़े  सुनकर .. मन  को  समझाने  चलो 
कल  की  सुबह  ...अब  तो   पहचाने
लेकर  अपनी  तू   मुरादें  पूरी  कर  यहाँ
जो  जीना  था  अब  तो  ज़ी  ले  पा ले  आसमान !

पलकों  में  सोये  सपने  अगर
पल  दो  पल  की  ये  दुनिया  मगर
यादों  के  लम्हें  ...अब  तो  जुड़  जाये .. ..सुनो
जाने  वालो  ..अब  तो  रुक  जाये
लेकर  अपनी  तू   मुरादें  पूरी  कर  यहाँ
जो  जीना  था  अब  तो  ज़ी  ले  पा ले  आसमान!
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लेकर  अपनी  तू   मुरादें  पूरी  कर  यहाँ
जो  जीना  था  अब  तो  ज़ी  ले  पा ले  आसमान!

अरमानो   के   जब   कटते   हैं   पर
कैसे  भूले  कोई  उड़ना  मगर
ना   सोचे   पंछी  क्यूँ   वो   घबराये
नया ....आशियाना  अपना  बनाये

लेकर  अपनी  तू   मुरादें  पूरी  कर  यहाँ
जो  जीना  था  अब  तो  ज़ी  ले  पा ले  आसमान !

some dohe from kabir, rahim

पाहन पूजे हरि मिलें तो मैं पूजूं पहाड़
ताते तो चाकी भली पीस खाए संसार!
( If one can reach God by worshiping stone, i will worship mountain. Even millstone is better as which is used to feed the world by grinding grain)


काकर पत्थर जोरि के मस्जिद लयी बनाए
ता चढ़ मुल्ला बांग दे क्या बहरा हुआ खुदाय!
( you build a mosque from stone and the Qazi shout on loud speaker from there as if God is deaf)


बुरा जो देखन मैं चला बुरा न मिलया कोय
जो मन देखा आपना मुझसे बुरा न कोय
(I was looking for evil in this world but couldn't find any, but when i looked into myself, i found myself the most evil)


बानी ऐसी बोलिये, मन का आपा खोय।
औरन को सीतल करै, आपहु सीतल होय॥
( Speak good so as to make others happy as well yourself)


पोथी पड़ पड़ जग मुआ हुआ न पंडित कोय
ढाई आखर प्रेम का पड़े सो पंडित होय
(True knowledge is that of love and not of the books and letters)


रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ परि जाय॥
( Never break the bond of love as its very difficult to join again and even if you do there is a joint (which takes away smoothness of the relation) )


जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग।
चन्दन विष व्यापत नहीं, लपटे रहत भुजंग॥
(People of good character cant be corrupted by bad company as sandalwood don't lose its coolness with snakes all around it)




रहिमन देख बडेंन को लघु न दीजिये डारि |
जहाँ काम अवे सुई कहा करे तरवार ||
 (don't neglect small when you see big as sword can't be used where you need a needle)

PMs letter disclosed by wikileaks

If our beloved PM Dr. Manamohan Singh would have got a chance to reveal his thoughts, probably that's how it would have been. प्रिय प्रधानमंत्री जी से मेरी सहानुभूति है और उनके लिए इस काल्पनिक पत्र का असली खुलासा!

विकीलीक्स का एक और खुलासा ..मनमोहन सिंह ने खुद देश के नाम सन्देश लिखा
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपनी दुनिया भर की आलोचना से तृस्त हो गए और उन्होंने अपना पक्ष रखने का निर्णय लिया!
पंद्रह अगस्त को अपने भाषण के बाद उन्होंने ये ख़त देश को सुनाने के लिए लिखा था लेकिन वो मौका उन्हें दिया नहीं गया! बारिश में ख़त भीग गया और उन्हें बेमन से लौटना पड़ा!
विकी लीक्स ने ये ख़त उनके घर से निकली रद्दी में से बरामद किया !

"मेरे प्यारे देशवासियों . आज मैं आप सबसे अपने मन की बात कहना चाहता हूँ. मुझ पर हर कोई आरोप लगाता रहता है की मैं कुछ बोलता नहीं हूँ. कमजोर हूँ और एक कठपुतली हूँ ! मुझे भी आज आप लोगो से शिकायत करनी है! आखिर मुझे भी अपनी भावनाएं व्यक्त करने का हक है! पहले तो  आप मुझे समझाओ  की रामलीला मैदान में इकठ्ठा होने से या जंतर मंतर पे धरना देने से देश का विकास कैसे होगा. अगर जो कानून आप कह रहे है वो मैं बना भी दूं तो क्या होगा. इतने सारे कानून पहले से हैं !  हमने सूचना का अधिकार एक्ट बना दिया लेकिन आप लोग हैं कि उसका पूरी तरह इस्तेमाल ही नहीं करते. ये सारे प्रोफेसनल्स जो अपने ऐसी ऑफिस छोड़ के रामलीला मैदान में आ गए... ना तो सूचना के अधिकार का प्रयोग करते हैं न वोट देते हैं..और न ही किसी भी तरह से प्रशासन में कोई भी योगदान देते हैं. अपना एक घंटा बचाने के लिए किसी भी बाबू को तुरंत रिश्वत दे देते हैं.. आधी जनता के पास पीने का पानी नहीं है तो आप सरकार को गाली देते हैं और खुद जाने कितना पानी बर्बाद करते हैं. और मुझे समझ में नहीं आता कि ये कोल्ड ड्रिंक क्यूँ पीते हैं.. उसमे कुछ होता तो है नहीं..मैंने सुना है एक लीटर ड्रिंक बनाने में फैक्टरी कई लीटर पानी बहा देती है. और जिम का कांसेप्ट तो मुझे समझ में नहीं आया. एक खाली पैकेट कूड़ेदान में डालने में आपको आलस आता है लेकिन जिम में घंटो पसीना बहाते हैं. देश में गरीबी है और आप शादी , पार्टी में लाखो रुपये उड़ा देते हैं. दस लाख कि गाडी लेंगे पर डीज़ल वाली ! अरे भाई सब कुछ मैं थोड़े करूंगा ..बिना आप लोगो के एक्टिव पार्टीसिपेशन के कोई बदलाव नहीं आ सकता . आप जो नियम क़ानून हैं पहले उनका तो यूज करो.फिर नए कानून कि दुहाई देना ! और ये मीडिया वाले बड़े अजीब लोग हैं. कोई मर रहा होगा तो उसकी फोटो लगा देंगे लेकिन उसे बचायेंगे नहीं क्यूँ कि ये उनका काम नहीं है! क्यूँ भाई ..आप इंसान नहीं हो क्या! अगर मीडिया वाले टी आर पी बढाने कि बजाये लोगो को और जागरूक बनाये तो कितना कुछ हो सकता है लेकिन आपको तो राखी और कटरीना की पड़ी रहती है ! और बाकी टाइम मेरी बुराई.
आपको इतनी दिक्कत है तो बताओ ...है कोई और आपके पास पी ऍम बनाने लायक. माना मैं उतना अच्छा लीडर नहीं हूँ लेकिन मैंने तो कहा नहीं था कि मुझे पी ऍम बना दो. आपने कोई अच्छा नेता ही नहीं चुना तो मजबूरन मुझे ही ये बोझ उठाना पड़ा. हम तो केवल आपके प्रतिनिधि हैं. हमारे हाथ में सब कुछ नहीं है. असली ताकत तो जनता के पास ही होती है. आप अपने मतलब के लिए किसी कि भी जी हुजुरी कर लेते हो और हम देश में राजनीतिक संतुलन बनाये रखने के लिए कुछ कर दें तो हमें कमजोर कहते हो. अरे आपने खुद ही अपने आप को कमजोर बना रखा है. आपको बिजली पानी सब चाहिए लेकिन इनके संरक्षण में खुद कुछ नहीं करना. आपके सामने कुछ गलत हो रहा हो तो कौन टेंशन ले कह के आगे बढ़ जाते हो. और ये किसान जो बेचारे गरीब हैं उनके लिए हम प्रोग्राम बनाते हैं और जो पहले से अमीर हैं वो बी पी एल कार्ड बनवा के उनका हिस्सा मार लेते हैं. अब ये सब मैं थोड़े रोक सकता हूँ. ये काम तो आपको और मीडिया को करना होगा. ब्लैक में गैस आप लो, और सप्लाई न हो तो हमें गाली दो!  अपराधियों को वोट आप दो और हम इलेक्सन रेफोर्म न करें तो हमें गालियाँ दो. टैक्स चोरी , ब्लैक में बिना बिल के सामान आप लें, भ्रष्ट नेताओ कि रैली में आप जाएँ, मार्केट में होर्डिंग और स्पेकुलेसन आप करें, और इकोनोमी कमज़ोर  हो तो हमें गाली दें. अगर आपके सामने कुछ गलत हो रहा है और आप कुछ नहीं करते तो आप भी उतने ही ज़िम्मेदार हैं. अरे जब आप सब मिलके संसद को हिला सकते हो तो इन छोटे मोटे भ्रष्ट लोगो के खिलाफ कुछ क्यूं नहीं करते! हम सब मिलके ही , मेहनत और ईमानदारी से हिंदुस्तान को आगे ले जा सकते हैं. मेरी आप सबसे अपील है कि आलोचना करने के बजाये खुद को और अपने आसपास के सिस्टम को सुधारने में हिस्सा लें , देश अपने आप आगे बढेगा!
जय हिंद!"

आपका
मनमोहन सिंह
दिनांक १५ अगस्त २०११
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मेरी ज़िन्दगी पे एक कविता


ज़िन्दगी तो मेरी  एकदम सुलझी  हुयी  सी है ..
कुछ ज्यादा ही  सीधी सादी  सी ..
एक  सीधे  रेशम  के  धागे  सी ..
जो  हवा  के  साथ  उड़ता  है ;
जिसमे  नहीं  पड़ा  कोई  फंदा  या  कोई गाँठ ...
बह रही हवा के साथ मानो  दूंढ  रहा  हो  अपना  बंधन  ..
मेरी  ज़िन्दगी  एक  सीधे  बिना  उलझे  धागे  सी !

जैसे हवा  में  गिरता एक पंख  का  टुकड़ा ...
न  तो  उड़  सकता  और  न  गिरता  जमीन  पे ..
बहता  रहता  अपनी  हलकी  सी  काया  लिए ...
चढ़  जाता  किसी  भी  फूंक  की  सवारी !

जैसे  पेड़  पे  एक  सूखा  पत्ता ..
जो  अटका  है  एक  सूखे  हुए  सिरे  से ..
अपने  वजूद  से  अलग  होके  भी
जुड़ा  है  किसी  जोड़  से ..
या
एक  ढलान  पे  लुड़कता  हुआ  पत्थर ...
झरने  के  पानी  सा  बहता...
किस  राह पे  जायेगा  वो ..
या  रुक  जायेगा  किसी  तने  से  टकरा  के ..

या  फिर  एक  पानी  की  बूंद  सी ..
जो  चली  थी  बादल  से ...
एक  अनजानी  सी  राह  पे ;
उड़ेगी  हवा  के  साथ  या  पहुंचेगी  ज़मीन  पर ...
गिरेगी  किसी  पत्ते  पे  या  मिलेगी  समंदर  से ...
बनने  को  फिर  से  एक  बूँद ...कभी पानी से भाप .. कभी  भाप  से  पानी   !
मेरी ज़िन्दगी!!

(c) प्रदीप सिंह  

eRail.in better way to search Trains : Its google again

http://erail.in/

जीं हाँ भाईओ और सखियों !! एक बार पुनः गूगल देवता ने अपना नया चमत्कार दिखाया॥ google analytic and google map has made search for trains super fast. बस एक बार try करिये । ये अद्भुत पेज आपको मिनटों मे आपकी ट्रेन के बारे मे सब कुछ बता देगा॥ I really appreciate the way everything is organised. You can see it yourself.. i dont need to say anything. So whenever you want to know status, route (with map) and running status, no need to go to the slow on thats www.indianrail.gov.in or www.trainenquiry.com , just go to erail.in and its all there. :-)
हालांकि ये भी अपनी सूचना इन्ही सब वेबसाइट्स से देता है। but its really very quick!!
हाँ॥ लेकिन अगर आपको टिकेट बुक करना है तो आपको www.irctc.co.in पे ही जाना पड़ेगा! :-)
तो अब देर किस बात की॥ न कोई इंतजार ... न कोई ad.. just info about your train!!
तो एक बार फिर बोलो॥ गूगल बाबा की जय !

blogging in hindi .. google created hindi translator

Hi All!
Check this URL. It is a very good innovation from Google: WHAT EVER U TYPE
IN ENGLISH IS CONVERTED TO HINDI after hitting space

http://www.google.com/transliterate/indic
And now you can blog in hindi also!! type in this page.. and copy hindi to ur mail , blog.
हमे भी बहुत अच्छा लगा
अब बात करें हिन्दी मे....मुझे आशा है की शीघ्र ही गूगल इसे gtalk, orkut मे सम्मिलित कर देगा
चलो भाई.. अब हिन्दी मे आराम से ब्लॉगिंग करो... इससे हमे अंग्रेज़ी से थोड़ा छुटकारा तो मिलेगा
तो मेरे प्यारे मित्रों .. शुरू हो जाओ .अब इन्टरनेट सिर्फ़ इंग्लिश के लिए नही है.. अपने विचारो को अपनी मातृभाषा मे व्यक्त करो!!
जय गूगल!
जय हिन्दी!
जय भारत!
P.S.
check these pages if you face any problem any problem
Mozilla users, please install this add on http://padma.mozdev.org/